लिखने वाली पेन बनी पौधा उगाने का जरिया, पटना के स्टार्टअप का देशभर में ऑर्डर

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Eco Friendly Pen with Seed Ball: पटना के युवा उद्यमी ऋषभ ने एक ऐसा अनोखा इको-फ्रेंडली प्रोडक्ट तैयार किया है, जो इस्तेमाल के बाद कचरा नहीं बल्कि पौधा बन जाता है. उनकी कंपनी रद्दी कागज से बनी सीड पेन और पेंसिल तैयार करती है, जिसके पीछे सब्जियों और फूलों के बीज लगाए जाते हैं. पेन का उपयोग खत्म होने के बाद इसे मिट्टी में डालते ही बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेते हैं. पर्यावरण संरक्षण की सोच से शुरू हुआ यह स्टार्टअप आज देश के कई हिस्सों में अपने प्रोडक्ट भेज रहा है और करीब डेढ़ करोड़ रुपये का सालाना कारोबार कर रहा है. रिपोर्ट- सचिदानंद

एक ऐसी कलम, जिसे लिखने के बाद अगर आप गमले या खेत में फेंक दें तो उसी जगह धनिया, मिर्च या टमाटर जैसे पौधे उग सकते हैं. भले ही आपको भरोसा न हो, लेकिन यह बिल्कुल सच है. पटना के ऋषभ की इस अनोखी पेन और पेंसिल से यह कमाल हो रहा है.

ऋषभ ने अपनी कंपनी ओरिजिंस ट्राइब प्राइवेट लिमिटेड की शुरुआत तीन साल पहले की थी. उनका मकसद रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक पर निर्भरता कम करना और पर्यावरण-अनुकूल प्रोडक्ट लोगों तक पहुंचाना है. इसी सोच और कड़ी मेहनत के बल पर ऋषभ की ओरिजिंस ट्राइब रद्दी कागज से पेन-पेंसिल, बांस से बोतल और नीम की लकड़ी से कंघी और ब्रश जैसे उत्पाद बना रही है.

होलसेल से लेकर खुदरा तक इनकी अच्छी बिक्री होती है. यही कारण है कि उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर करीब डेढ़ करोड़ रुपये के आसपास है. ऐसी जानकारी उन्होंने लोकल 18 को दी. ऋषभ के मुताबिक उनकी कंपनी बेकार समझकर फेंक दिए गए. कागज को रिसाइकिल कर उपयोगी पेन और पेंसिल तैयार करती है.

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इस प्रक्रिया में रद्दी पेपर को दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाता है. इसके बाद इको फ्रेंडली प्रोडक्ट बनाई जाती है. इस पेन-पेंसिल की खासियत यह है कि इनके अंतिम हिस्से में अलग-अलग सब्जियों, मसालों और फूलों के बीज लगाए जाते हैं. जब पेन या पेंसिल इस्तेमाल के बाद मिट्टी में डाल दी जाती है तो कागज धीरे-धीरे गलकर मिट्टी में मिल जाता है और अंदर मौजूद बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले लेता है. इस तरह एक साधारण लिखने वाली चीज पौधा उगाने का जरिया बन जाती है.

ऋषभ बताते हैं कि इस प्रोडक्ट का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे प्लास्टिक का उपयोग नहीं होता है. इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता. साथ ही, उपयोग के बाद इसे फेंकने के बजाय मिट्टी में डालने से टमाटर, मिर्च या अन्य पौधे उग सकते हैं. इन्हें रोजमर्रा के उपयोग में लाया जा सकता है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इतनी उपयोगी पेन-पेंसिल की कीमत मात्र 10 से 15 रुपये के बीच रखी गई है.

ओरिजिंस ट्राइब के नाम से स्टार्ट अप कंपनी चलाने वाले ऋषभ और विश्वजीत बताते हैं कि उनकी इस कंपनी का मकसद पर्यावरण को बचाना और हरा भरा वातावरण बनाना हैं. बांस से बने बोतल, टूथब्रश, रेजर समेत कई उत्पाद उनकी कंपनी बनाती हैं.

इसके अलावा सीड बॉल के तहत सीड पेंसिल, दिल, पेपर टैग, प्रेस कॉन्फ्रेंस कीट के अलावा ऐसे दर्जनों प्रोडक्ट हैं जिसे प्रयोग में लाने के बाद मिट्टी में गाड़ देने से उससे पौधा निकल जाएगा. वहीं, कॉरपोरेट गिफ्टिंग के लिए भी सारे प्रोडक्ट पेपर और बांस से बने होते हैं. इनका प्रोडक्ट बिहार सरकार के कई विभागों में भी जाता है. भारत के अलग-अलग जगहों से ऑर्डर आते हैं. इस तरह यह कंपनी फिलहाल डेढ़ करोड़ का सलाना टर्नओवर कर रही है.

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