होली के बाद अस्पतालों में बढ़ती मरीजों की संख्या, मैक्स के डॉक्टर ने बताई वजह

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Holi and Health Issue: इसमें कोई दोराय नहीं कि होली खुशी का त्योहार है, लेकिन लोग ऐसी कई गलतियां कर बैठते हैं जिससे की तबीयत बिगड़ने लगती है. इसमें केमिकल वाले रंगों के इस्तमाल से लेकर शराब के सेवन जैसे कारण शामिल हैं.

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Holi Health Risks: होली रंगों और खुशी का त्योहार है, लेकिन हर साल इस त्योहार के बाद भारत के अस्पतालों के इमरजेंसी विभाग में केस बढ़ जाते हैं. डॉ. धीरज भास्करण नायर सीनियर कंसल्टेंट – इमरजेंसी और ट्रॉमा मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, वैशाली बताते हैं कि होली से जुड़ी ज्यादातर समस्याएं बदकिस्मती नहीं, बल्कि लापरवाही की वजह से होती हैं. अगर लोग प्राकृतिक या सुरक्षित रंगों का इस्तेमाल करें, आंखों की सुरक्षा रखें, पर्याप्त पानी पिएं और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, तो इन जोखिमों को काफी कम किया जा सकता है.

होली में होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं

आंखों की चोटें- होली के दौरान सबसे आम समस्याओं में से एक हैं. कई सिंथेटिक रंगों में माइका, कांच का पाउडर और डाई मिलाए जाते हैं, जो आंखों में तेज जलन पैदा कर सकते हैं. ऐसे मामलों में डॉक्टरों को आंखों में लालपन, कॉर्निया पर खरोंच और कभी-कभी अस्थायी रूप से देखने में परेशानी जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं. अगर गंदे या रंग लगे हाथों से आंखों को रगड़ा जाए, तो छोटी समस्या भी गंभीर बन सकती है.

त्वचा से जुड़ी समस्याएं- कुछ केमिकल वाले रंग त्वचा पर एलर्जी, जलन, मुंहासे या एक्जिमा को बढ़ा सकते हैं. कई मरीजों में चेहरे और गर्दन पर खुजली, सूजन और छाले जैसी परेशानी देखी जाती है. जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील होती है या जिन्हें पहले से एलर्जी है, वे अक्सर सावधानी नहीं बरतते. त्वचा पर तेल लगाना और रंगों को जल्दी साफ करना ऐसी समस्याओं को कम कर सकता है.

सांस से जुड़ी दिक्कतें- पाउडर वाले रंग सांस के रास्ते में जाकर जलन पैदा कर सकते हैं. इससे अस्थमा बढ़ सकता है या अचानक सांस लेने में दिक्कत हो सकती है. कभी-कभी हल्की खांसी भी गंभीर सांस की समस्या में बदल सकती है.

शराब से जुड़ी इमरजेंसी- ज्यादा शराब पीने, शरीर में पानी की कमी और गर्म मौसम की वजह से चक्कर आना, उल्टी होना और शरीर में मिनरल्स का संतुलन बिगड़ सकता है. त्योहार के माहौल में लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा पी लेते हैं और बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं.

About the Author

शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

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