शहरों में कोहराम गांव में बन रहे पकवान, ईंट और मिट्टी के चूल्हे का फिर लौटा ट्रेंड, बनाने का तरीका भी आसान!

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Mitti ka Chulha bnane ke Tips: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब धीरे-धीरे भारत की रसोई तक भी पहुंचने लगा है. कई जगह गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों को खाना बनाने में परेशानी हो रही है. ऐसे में लोग एक बार फिर पुराने समय के मिट्टी के पारंपरिक चूल्हे की ओर लौटने लगे हैं.

गांवों में तो पहले से ही लकड़ी और गोबर के उपलों से चूल्हे पर खाना बनाया जाता है, लेकिन अब शहरों में भी कुछ लोग इसे अपनाने लगे हैं. कम खर्च में ईंट और मिट्टी से बनने वाला यह चूल्हा आसानी से तैयार हो जाता है और इसमें खाना भी जल्दी पक जाता है.

ईंट और मिट्टी से बनता है मजबूत चूल्हा
कल्आ गांव की रसोइया निर्मला पटेल बताती हैं कि मिट्टी का चूल्हा आज भी कई घरों में उपयोग किया जाता है. इसमें लकड़ी या गोबर के उपलों को ईंधन के रूप में जलाया जाता है, जिससे कम खर्च में लंबे समय तक खाना बनाया जा सकता है.

चूल्हा बनाने के लिए पहले ऐसी जगह चुनी जाती है जहां धुआं आसानी से बाहर निकल सके. इसके बाद जमीन को समतल करके चार से छह ईंटों से आधार बनाया जाता है और मिट्टी, गोबर और पानी का गाढ़ा मिश्रण लगाकर चूल्हे को आकार दिया जाता है.

इस तरह तैयार किया जाता है देसी चूल्हा
निर्मला पटेल के अनुसार चूल्हा बनाने के लिए मिट्टी और भूसे में पानी मिलाकर मजबूत मिश्रण तैयार किया जाता है. इसके बाद दोनों तरफ चार-चार ईंटें रखकर चूल्हे की दीवार बनाई जाती है. ऊपर मिट्टी की परत लगाने के बाद फिर ईंटें लगाई जाती हैं. पीछे की ओर खाली जगह को आधी ईंटों से बंद कर दिया जाता है और पूरे ढांचे को मिट्टी के मिश्रण से अच्छी तरह से कवर कर दिया जाता है, ताकि चूल्हा मजबूत बन सके.

धुआं बाहर निकालने के लिए लगाई जाती है चिमनी
चूल्हे के ऊपर बर्तन रखने के लिए गोल या चौकोर जगह बनाई जाती है ताकि खाना बनाते समय बर्तन ठीक से टिक सके. सामने की तरफ लकड़ी डालने के लिए एक छोटा सा मुंह खुला छोड़ा जाता है. धुएं की समस्या से बचने के लिए पीछे की तरफ छोटी चिमनी या पाइप भी लगाया जा सकता है, जिससे धुआं सीधे बाहर निकल जाए.

सूखने के बाद किया जाता है इस्तेमाल
चूल्हा तैयार होने के बाद उसे एक से दो दिन तक सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है. जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाती है तब उसमें हल्की लकड़ी जलाकर पहली बार इस्तेमाल किया जाता है. धीरे-धीरे यह चूल्हा और मजबूत हो जाता है और लंबे समय तक काम आता है.

मिट्टी के चूल्हे पर बना खाना सेहत के लिए फायदेमंद
आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. आर. पी. परौहा बताते हैं कि मिट्टी के चूल्हे पर पका भोजन सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. इसमें पका खाना स्वाद में अलग होता है और इसमें आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस, पोटैशियम, जिंक और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण इलाकों में मिट्टी के चूल्हे की उपयोगिता आज भी बनी हुई है और अब शहरों में भी लोग इसे फिर से अपनाने लगे हैं.

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