होली भाई दूज 2026 आज: भाई की लंबी उम्र के लिए कब लगाएं तिलक? जानिए शुभ मुहूर्त और विधि

Date:

[ad_1]

Holi Bhai Dooj 2026: रंगों का त्योहार खत्म होते ही रिश्तों की मिठास को और गहरा करने का दिन आता है होली भाई दूज. होली की खुशबू अभी हवा में रहती है और बहनें अपने भाई के लिए तिलक की थाली सजाने लगती हैं. यह सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भरोसे, अपनापन और सुरक्षा के वचन का दिन है. साल 2026 में होली भाई दूज को लेकर कई लोगों के मन में सवाल है कि यह 4 मार्च को है या 5 मार्च को. पंचांग और ग्रह स्थिति के आधार पर इसकी सही तिथि और तिलक का समय जानना जरूरी है, ताकि पूजा पूरे विश्वास के साथ की जा सके.

इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर उसकी लंबी उम्र और खुशहाल जीवन की कामना करती हैं. माना जाता है कि सही समय पर किया गया तिलक सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाता है. ग्रहों का संतुलन भी रिश्तों पर असर डालता है, इसलिए ज्योतिष गणना के अनुसार मुहूर्त का ध्यान रखना शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं Holi Bhai Dooj 2026 की सही तारीख, तिलक का समय और पूजा की सरल विधि. आइए जानते हैं ज्योतिषी एवं वास्तु सलाहकार पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा से.

कब है होली भाई दूज 2026? जानिए सही तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को होली भाई दूज, जिसे भ्रातृ द्वितीया भी कहा जाता है, मनाई जाती है. वर्ष 2026 में द्वितीया तिथि की शुरुआत 4 मार्च को शाम 4 बजकर 48 मिनट से हो चुकी है और इसका समापन 5 मार्च को सुबह 5 बजकर 3 मिनट पर होगा. ज्योतिष शास्त्र में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है. चूंकि 5 मार्च की सुबह द्वितीया तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए होली भाई दूज 5 मार्च 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी.

द्वितीया तिथि और ग्रह स्थिति का प्रभाव
इस दिन चंद्रमा की स्थिति मन और संबंधों पर गहरा असर डालती है. द्वितीया तिथि को चंद्रमा सौम्य प्रभाव देता है, जिससे भाई-बहन के रिश्ते में मधुरता और विश्वास बढ़ता है. ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार ग्रह स्थिति पारिवारिक सौहार्द के लिए अनुकूल संकेत दे रही है.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

तिलक का शुभ मुहूर्त: कब करें पूजा?
5 मार्च 2026 को तिलक के लिए कई शुभ मुहूर्त बन रहे हैं.

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 05:04 से 05:53 तक
अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:09 से 12:56 तक

प्रातःकाल से दोपहर तक का समय तिलक के लिए शुभ माना गया है. खासतौर पर अभिजित मुहूर्त में किया गया तिलक भाई के जीवन में सफलता और सुरक्षा का आशीर्वाद देता है. कई घरों में देखा जाता है कि बहनें सुबह-सुबह ही थाली सजाकर बैठ जाती हैं. कहीं रोली की खुशबू होती है, तो कहीं चंदन घिसने की परंपरा अब भी निभाई जाती है. समय चाहे आधुनिक हो गया हो, पर यह रस्म आज भी उतनी ही आत्मीय है.

क्यों खास है होली के बाद की भाई दूज?
दीपावली के बाद आने वाली भाई दूज तो सब जानते हैं, लेकिन होली के बाद मनाई जाने वाली यह भ्रातृ द्वितीया भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. मान्यता है कि इस दिन बहन द्वारा किया गया तिलक भाई को दीर्घायु और संकटों से रक्षा का आशीर्वाद देता है. ज्योतिषीय मान्यता यह भी कहती है कि द्वितीया तिथि पर यम और यमी (यमुना) का स्मरण करने से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है. यही कारण है कि इस दिन बहनें अपने भाई के मंगल की कामना करते हुए पूरे विधि-विधान से पूजा करती हैं.

होली भाई दूज पूजा विधि
सुबह स्नान के बाद साफ या नए वस्त्र धारण करें. पूजा स्थान को स्वच्छ कर आटे या चावल के घोल से चौक बनाएं. भाई को लकड़ी के पाटे पर उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर मुख करके बैठाएं.

इसके बाद कुमकुम, अक्षत और चंदन से तिलक करें. भाई की कलाई पर कलावा बांधें और आरती उतारें. मिठाई खिलाकर उनके सुख-समृद्धि की कामना करें. अंत में भाई अपनी बहन को उपहार या दक्षिणा देकर आभार व्यक्त करता है.

आज के समय में उपहार का रूप बदल गया है कभी डिजिटल गिफ्ट कार्ड, तो कभी कोई छोटी-सी सरप्राइज पार्टी. लेकिन तिलक की वह लकीर आज भी वैसी ही है, जो माथे से दिल तक जाती है.

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

Popular

More like this
Related