‘औकात’ की जंग भगोरिया उत्सव तक पहुंची, कैलाश विजयवर्गीय-उमंग सिंघार के बीच सियासी संग्राम; मचा घमासान

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‘औकात’ की जंग भगोरिया उत्सव तक पहुंची, विजयवर्गीय-सिंघार के बीच सियासी संग्राम

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मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार के बीच हुई बहस खूब चर्चा में रही थी, तब दोनों तरफ से औकात जैसे शब्द उछाले गए थे. अब इनकी आंच भगोरिया उत्सव तक पहुंच चुकी है और दोनों नेता फिर से आमने-सामने आ गए हैं.

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उमंग सिंघार और कैलाश विजयवर्गीय

आदिवासी समाज के 7 दिवसीय लोक पर्व भगोरिया काल धूमधाम से समापन हो गया है. इस उत्सव के लिए महिला, बुजुर्ग और युवकों सहित हर वर्ग में खूब उत्साह देखा गया. भगोरिया उत्सव में पक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने इसमें हिस्सा लिया. वहीं अब ये उत्सव राजनीति का अखाड़ा बनता जा रहा है, जहां कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार ने एक-दूसरे पर पलटवार किया है.

उमंग सिंघार ने कैलाश विजयवर्गीय को याद दिलाई पुरानी बात
मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय जब भगोरिया उत्सव में शामिल होने के लिए अलीराजपुर पहुंचे, तो नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के लिए कहा कि जो मंत्री आदिवासियों को औकात बता रहे थे, वे अब आदिवासियों का अपमान करने आए हैं या अपने बयान पर माफी मांगने आए हैं.

दूसरी तरफ कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संयम बरतते हुए कहा कि वह यहां राजनीति नहीं, उत्सव देखने आए हैं और किसी भी प्रकार की राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे. उन्होंने आदिवासी समाज को भगोरिया और होली की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रदेश की भाजपा सरकार आदिवासियों के कल्याण के लिए कई योजनाएं चला रही है

उमंघ सिंघार ने फिर अलापा पुराना राग
इसके बाद दोनों नेताओं के बीच विवाद यहीं पर खत्म नहीं हुआ. मंगलवार को उमंग सिंघार ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय का भगोरिया उत्सव में आना सिर्फ एक दिखावा है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तो सदन में माफी मांग ली, लेकिन विजयवर्गीय ने अभी तक इस पर खेद नहीं जताया है.

कैलाश विजयवर्गीय ने दिया जवाब
इस पर कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मैं हर साल भगोरिया उत्सव में आता है और यह हमारी आदिवासी संस्कृति का उत्सव है. जिस तरह से नेता प्रतिपक्ष द्वारा बयानबाजी की जा रही है. वह उनकी मानसिकता को दर्शाता है.

विधानसभा में हुई थी बहस
मध्य प्रदेश विधानसभा में बजट सत्र के दौरान कैलाश विजयवर्गीय और उमंग सिंघार के बीच तीखी बहस देखने को मिली थी, तब विजयवर्गीय ने उन्हें औकात में रहने जैसे शब्द कहे थे. इसके बाद सिंघार ने उन्हें उत्तर देते हुए कहा था कि मैं औकात दिखा दूंगा. सिंघार की आदिवासी क्षेत्रों में मजबूत पकड़ मानी जाती है. इसी वजह से वह इस मुद्दे को जिंदा रखना चाहते हैं.

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