65 साल की उम्र में सपने पूरे, हाउसवाइफ से बिजनेस वूमन बनीं रांची की ये 3 महिलाएं, लाखों की कमाई कर जी रही हैं शानदार जिंदगी!

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रांची: मन में अगर दृढ़ संकल्प हो तो क्या कुछ नहीं हो सकता है. इस बात को सच कर दिखाया झारखंड की राजधानी रांची की 3 महिलाओं ने. जिन्होंने अपनी हिम्मत और हौसले से सिर्फ काम ही बाहर निकल कर नहीं की, बल्कि अपना ब्रांड ही खड़ा कर डाला. वह भी ऐसा ब्रांड कि जिसकी डिमांड आज बड़े से लेकर छोटे हर तबके के लोगों के बीच में है. आइये जानते हैं इस ब्रांड के बारे में.

सोनी के मसले के दीवाने हैं लोग

सोनी राज सिंह रांची की रहने वाली हैं. वह बताती हैं कि हमने अपना ब्रांड खड़ा किया है, जिसका नाम  स्पाइसीया है. इस ब्रांड के तहत हम लोग कई सारे मसाले खुद बनाने का काम करते हैं. क्योंकि मसाला ऐसी चीज है. जो हर घर और हर किचन में इस्तेमाल होता है. मसाले की डिमांड कभी कम होने वाली नहीं है और न ही इसका कोई विकल्प है.

सोनी ने बताया कि हम लोगों ने केवल घर में हजार रुपए से ही इस काम को शुरू किया था. आज 5 साल में इसका टर्नओवर 60 लाख के करीब जा चुका है. इसमें उनका बेटा भी सहयोग करता है. हल्दी धनिया पाउडर समेत 18 से 20 तरह के मसाले आपको उनके पास मिल जाएंगे और लोहरदगा, गुमला और अब तो यूपी और बिहार तक भी सप्लाई होने लगी है. आज वह हाउस वाइफ से बिजनेस वूमन बन चुकी हैं.

माड़ भात खाने वाली एमलीन आज खा रही चिकन

कभी माड़ भात में गुजारा करने वाली एमलीन बताती हैं कि आज से 3 साल पहले की बात बता है. वह माडड भात खाया करती थीं.  क्योंकि उनके पास थाली में सब्जी नहीं होती थी, लेकिन आज चिकन चावल साग जो मन करता है. वह खाती हैं. आज थाली रंग फिरंगी सब्जी से सज रहती है. वह इसलिए क्योंकि 3 साल पहले सरकार से लोन लेकर अचार बनाने का काम शुरू किया. आचार के साथ हम लोग कई तरह के मडुवा रागी के आटा इसी के लड्डू, लाह की चूड़ियां यह सब बनाने का काम करती हैं.

उन्होंने बताया कि आज आलम ये है कि महीने के आराम से 35,000 तक की कमाई हो जाती है. कभी 2000 भी नसीब नहीं था, लेकिन आज उनके लिए 30000 से 35000 रुपए बहुत बड़ी रकम है. हम लोग रांची के खूंटी के जंगल में रहते हैं. जहां पर कभी गंदे पानी पीने के लिए मजबूर थे. आज घर में आरो लगवा ली हैं. पूरे घर को चलाती हैं. साथ ही उनके बच्चे प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं. आज उनकी जिंदगी बदल गई है.

65 साल की उम्र में सपने को किया पूरा

वहीं, रांची की किरण बताती हैं कि 65 साल की उम्र में मुझे लगा था कि अपने पैशन को फॉलो करना चाहिए. मेरी मां ऊंन से बड़े सुंदर स्वेटर मफलर बनाती थी. फिर मुझे पता चला कि आज इनसे घर के डेकोरेटिव आइटम्स बनते हैं. तो मैंने सोचा जब हाथ में हुनर है तो क्यों ना यह बनाया जाए और मैंने बनाना शुरू किया. झारक्राफ्ट से भी जुड़ी, इससे फायदा यह हुआ कि सरकारी स्टॉल मुझे मिलने लगे और झारखंड व देश के अलग-अलग राज्यों में जाने का मौका मिला.

आज आलम यह है की 65 साल की उम्र में वह आत्मनिर्भर बन गई है. वह खुद कमाती हूं. इस उम्र में अपनी शौक खुद पूरा करती हैं. आज उन्हें खुद को देखकर बड़ा अच्छा लगता है. अकेले घूमने भी निकल जाती हैं. किरण बताती हैं कि अगर मन में कुछ ठान लो तो फिर मुश्किलों की कोई औकात नहीं रह जाती है. इन तीनों महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि आप घर बैठे भी सफलता हासिल कर सकती हैं.

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