[ad_1]
Last Updated:
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है. अमेरिका से मिली 30 दिन की अस्थायी छूट का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि भारतीय कंपनियों ने करीब दो करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीद लिया है. इस कदम को वैश्विक तेल आपूर्ति में अनिश्चितता के बीच भारत की रणनीतिक तैयारी के रूप में देखा जा रहा है.
अमेरिकी छूट मिलते ही भारत ने खरीदे 2 करोड़ बैरल रूसी तेल, ऊर्जा सुरक्षा पर बड़ा दांव. (Image:AI)
नई दिल्ली. भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने समुद्र में मौजूद रूसी कच्चे तेल की खरीद तेज कर दी है. बताया जा रहा है कि अमेरिका से मिली 30 दिन की अस्थायी छूट के बाद भारतीय कंपनियों ने करीब दो करोड़ बैरल रूसी तेल खरीद लिया है. इससे भारत अपने तेल भंडार को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है.
अमेरिकी छूट के बाद तेज हुई खरीद
सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन ने हाल ही में एक अस्थायी लाइसेंस जारी किया है, जिसके तहत पांच मार्च 2026 से पहले जहाजों पर लोड किए गए रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की भारत में आपूर्ति और उतारने की अनुमति दी गई है. यह छूट चार अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी. इसी राहत का फायदा उठाते हुए भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने समुद्र में खड़े टैंकरों से बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल खरीद लिया. हालांकि कंपनियां यह भी जांच कर रही हैं कि इस छूट के तहत प्रतिबंधित संस्थाओं से तेल खरीदने की कानूनी स्थिति क्या है.
समुद्र में फंसा था बड़ी मात्रा में रूसी तेल
जानकारों के अनुसार इस समय बड़ी मात्रा में रूसी कच्चा तेल समुद्र में टैंकरों पर मौजूद है. करीब 1.5 करोड़ बैरल तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के आसपास खड़े जहाजों में है, जबकि लगभग 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास खड़े टैंकरों में बताया जा रहा है. इसके अलावा भूमध्य सागर और स्वेज नहर क्षेत्र में भी रूसी तेल से भरे जहाज मौजूद हैं, जो आने वाले कुछ हफ्तों में भारत पहुंच सकते हैं.
भारतीय कंपनियां फिर सक्रिय
भारतीय रिफाइनिंग कंपनियों ने हाल के महीनों में रूसी तेल की खरीद कुछ हद तक कम कर दी थी, लेकिन अब एक बार फिर यह खरीद बढ़ती दिख रही है. हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड (एमआरपीएल) ने दिसंबर के बाद रूसी तेल खरीद दोबारा शुरू कर दी है. वहीं निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज भी रूसी तेल की नई डिलिवरी के विकल्प तलाश रही है.
भारत की ऊर्जा नीति में विविधता पर जोर
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि भारत ने रूस से तेल खरीद कभी पूरी तरह बंद नहीं की थी. देश हमेशा अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग स्रोतों पर निर्भर रहने की नीति अपनाता रहा है. यूक्रेन युद्ध के बाद भारत रूस से सस्ता तेल खरीदने वाला प्रमुख देश बन गया था. हालांकि हाल के महीनों में अमेरिकी दबाव के कारण इसमें कुछ कमी आई थी, लेकिन नई परिस्थितियों में फिर से खरीद बढ़ती दिख रही है.
पश्चिम एशिया संकट से बढ़ी चिंता
विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक तेल बाजार में नई अनिश्चितता पैदा कर दी है. खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है. ऐसे में भारत अपने ऊर्जा भंडार को सुरक्षित रखने के लिए समुद्र में उपलब्ध रूसी तेल खरीदने की रणनीति अपना रहा है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत फिलहाल अस्थायी है और आने वाले समय में वैश्विक बाजार की स्थिति पर ही तेल आपूर्ति और कीमतों का रुख तय होगा.
About the Author
Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
[ad_2]
Source link
