US-ईरान तनाव, महंगा क्रूड: इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे 5 बड़े फैक्टर

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US-ईरान तनाव, महंगा क्रूड: इस हफ्ते शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे 5 बड़े फैक्टर

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पिछले हफ्ते की शुरुआत में मजबूती दिखाने के बाद भारतीय शेयर बाजार में अचानक गिरावट देखने को मिली. निवेशकों ने मुनाफावसूली के साथ वैश्विक हालात को लेकर सतर्क रुख अपनाया. अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की तेजी और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने बाजार पर दबाव बढ़ाया. ऐसे में इस हफ्ते कुछ अहम फैक्टर बाजार की दिशा तय कर सकते हैं.

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कच्चे तेल से महंगाई तक, इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल तय करेंगे ये बड़े संकेत. (Image:Reuters)

नई दिल्ली. पिछले कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. प्रमुख सूचकांक BSE Sensex करीब 1,097 अंक गिरकर 78,918 के आसपास बंद हुआ, जबकि Nifty 50 भी करीब 315 अंक टूटकर 24,450 के स्तर पर पहुंच गया. पूरे हफ्ते के दौरान बाजार में लगभग 3 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक घटनाक्रम और निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार में दबाव बना हुआ है.

अमेरिका-ईरान तनाव बना सबसे बड़ा फैक्टर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखाई दे रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच टकराव की स्थिति ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के खिलाफ चल रहे अभियानों को लेकर बयान दिया, जिससे स्थिति और संवेदनशील हो गई. खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ने की आशंका है.

कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
मध्य पूर्व में संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिली है. वैश्विक मानक ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमत 92 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई है. तेल की कीमतों में यह तेजी भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों के लिए चिंता का विषय मानी जाती है. अगर कच्चा तेल लगातार महंगा रहता है तो इससे महंगाई और व्यापार घाटे पर असर पड़ सकता है, जिसका दबाव शेयर बाजार पर भी देखने को मिलता है.

सोना-चांदी और विदेशी निवेशकों की चाल पर नजर
वैश्विक अनिश्चितता के बीच निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी रुख कर रहे हैं. यही वजह है कि सोने और चांदी की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. दूसरी ओर विदेशी संस्थागत निवेशक यानी FII भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशक यानी DII खरीदारी से बाजार को सहारा दे रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक वैश्विक हालात में स्पष्टता नहीं आती, तब तक विदेशी निवेशकों की वापसी मुश्किल लगती है.

महंगाई के आंकड़े भी तय करेंगे बाजार की दिशा
इस हफ्ते निवेशकों की नजर भारत के महंगाई के आंकड़ों पर भी रहेगी. 12 मार्च को जारी होने वाला उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी Consumer Price Index यह संकेत देगा कि हाल में कच्चे तेल की कीमतों में आई तेजी का महंगाई पर कितना असर पड़ा है. अगर महंगाई ज्यादा रहती है तो इससे ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों को लेकर भी असर पड़ सकता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक तनाव, तेल की कीमतें और आर्थिक आंकड़े मिलकर भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय करेंगे.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें

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