Iran Israel War | Iranian Navy Sailors in Agra | ईरानी युद्धपोत पर अमेरिका का हमला

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आगरा: कहते हैं कि मौत कब और कहां दस्तक दे दे, कोई नहीं जानता. ईरान की नौसेना के उन 80 जांबाज नाविकों ने भी नहीं सोचा होगा कि आगरा के ताजमहल के सामने मुस्कुराते हुए ली गई उनकी तस्वीरें, उनके जीवन की आखिरी यादें बन जाएंगी. भारत की मेहमाननवाजी का लुत्फ उठाकर स्वदेश लौट रहे ईरानी युद्धपोत IRIS Dena पर हुए एक भीषण हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है.

भारत क्यों आए थे ईरानी नाविक?
दरअसल, फरवरी 2026 में भारत के विशाखापट्टनम में अंतरराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन-2026’ (MILAN 2026) का आयोजन किया गया था. इस मेगा ड्रिल में दुनिया भर की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था. ईरान की नौसेना का सबसे आधुनिक और स्वदेशी युद्धपोत ‘IRIS Dena’ भी इसी अभ्यास में शामिल होने भारत पहुंचा था. 15 से 25 फरवरी के बीच चले इस अभ्यास के दौरान ईरानी नाविकों ने न केवल युद्ध कौशल दिखाया, बल्कि भारत की संस्कृति को भी करीब से जाना.

ताजमहल का दीदार और आगरा की यादें
नौसैनिक अभ्यास के बीच मिले खाली समय में ईरानी नाविकों के एक दल ने ‘अतुल्य भारत’ कार्यक्रम के तहत उत्तर भारत का रुख किया. ये नाविक मोहब्बत की निशानी ताजमहल देखने आगरा पहुंचे. सफेद संगमरमरी इमारत के सामने इन जवानों ने जमकर सेल्फी ली, वीडियो बनाए और स्थानीय गाइडों से ताज का इतिहास जाना.

बीच समंदर में अमेरिका का हमला और तबाही
खुशियां मनाकर जब यह दल अपने देश ईरान की ओर रवाना हुआ, तब किसे पता था कि रास्ते में मौत उनका इंतजार कर रही है. खबरों के मुताबिक, भारत से लौटते समय खुले समुद्र में अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने 4 मार्च को श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में ईरान के युद्धपोत IRIS Dena पर हमला कर दिया. इस हमले में जहाज बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर समुद्र में डूब गया.

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस युद्धपोत पर लगभग 180 सदस्य सवार थे, जिनमें से 80 ईरानी नाविकों की मौत हो गई है. मरने वालों में वे युवा भी शामिल हैं जिनकी तस्वीरें कुछ दिन पहले आगरा और विशाखापट्टनम के तटों पर वायरल हुई थीं.

क्या था IRIS Dena?
IRIS Dena ईरान की ‘मौज क्लास’ का एक फ्रिगेट (युद्धपोत) था, जिसे ईरानी नौसेना का गौरव माना जाता था. इसे पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक से बनाया गया था और साल 2021 में इसे आधिकारिक रूप से नौसेना में शामिल किया गया था. इसका नाम ईरान के प्रसिद्ध ‘माउंट डेना’ के नाम पर रखा गया था. इस जहाज के डूबने को ईरान के लिए एक बड़ा रणनीतिक और भावनात्मक झटका माना जा रहा है.

तनाव के साये में दुनिया
इस हमले के बाद मिडिल ईस्ट और हिंद महासागर क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है. ईरानी नौसेना के कमांडर रियर एडमिरल शहरम ईरानी और कमांडिंग ऑफिसर अबुजार जरीं भी इस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थे, जिन्होंने अभ्यास के दौरान भारतीय नौसेना प्रमुख से मुलाकात की थी. आज जब उन नाविकों की आगरा वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर दोबारा देखी जा रही हैं, तो हर कोई भावुक है. भारत की जिन गलियों में वे कुछ दिन पहले मेहमान बनकर घूम रहे थे, वहां अब बस उनकी यादें बची हैं.

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