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टीएमसी के टिकट पर बाबुल सुप्रियो, पूर्व DGP राजीव कुमार, कोयल मल्लिक और मेनका गुरुस्वामी जीत गए हैं. ममता बनर्जी ने राज्यसभा के लिए इन नामों पर मुहर लगाई थी. राज्यसभा आए इन नेताओं में सबसे ज्यादा चर्चा बाबुल सुप्रियो की है, जिन्हें कभी बाबा रामदेव ने बीजेपी का टिकट दिलाया था, लेकिन अब वे टीएमसी के टिकट पर संसद पहुंच रहे हैं. वहीं, सीबीआई जांच झेल चुके राजीव कुमार और अन्य चेहरों को लेकर भी सियासी घमासान तेज हो गया है.
टीएमसी के चार नेता राज्यसभा पहुंचे हैं.
कोलकाता. टीएमसी के राज्यसभा उम्मीदवार बाबुल सुप्रियो, कोएल मल्लिक, राजीव कुमार और मेनका गुरुस्वामी राज्यसभा के लिए चुन लिए गए हैं. बीजेपी से राहुल सिन्हा उच्च सदन के लिए निर्वाचित हुए हैं. पश्चिम बंगाल की सीएम और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने बहुत सोच समझकर ये चारों नाम तय किए थे. इन नामों में सबसे चौंकाने वाला नाम बाबुल सुप्रियो का है. बाबुल सुप्रियो का सफर भारतीय जनता पार्टी के एक कट्टर सिपाही से शुरू होकर अब तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सांसद तक जा पहुंचा है. बीजेपी समर्थकों और राजनीतिक पंडितों के बीच यह सवाल गूंज रहा है कि जिस शख्स को बाबा रामदेव ने राजनीति में एंट्री दिलाई थी, वह एक बार फिर से बीजेपी के खिलाफ टीएमसी का झंडा बुलंद करने राज्यसभा पुहंच गया है. टीएमसी की राज्यसभा में अभी 13 सीटें हैं, लेकिन इन चारों के आने के बाद उनकी संख्या बढ़कर 17 हो गई है.
बाबुल सुप्रियो के राजनीति में आने का किस्सा किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक विमान यात्रा के दौरान बाबुल सुप्रियो की मुलाकात योग गुरु बाबा रामदेव से हुई थी. उस समय बाबुल एक गायक के तौर पर संघर्ष कर रहे थे. रामदेव उनसे इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने तुरंत तत्कालीन बीजेपी नेतृत्व से बात की और आसनसोल से उनका टिकट पक्का करवा दिया. मोदी लहर में बाबुल चुनाव जीते और केंद्र में मंत्री भी बने. लेकिन 2021 में समीकरण बदले और बाबुल ने बीजेपी को ‘दगा’ देते हुए टीएमसी का दामन थाम लिया. वह बीते बंगाल चुनाव में विधायी का चुनाव लड़कर जीतकर ममता सरकार में मंत्री भी बने थे. लेकिन अब वह एक बार फिर से केंद्र की राजनीति में आ रहे हैं.
कोयल मल्लिक और बाबुल सुप्रियो राज्यसभा के लिए चुने गए. (फाइल फोटो)
ममता का ‘दुलरुआ’ अफसर से सांसद तक
टीएमसी की इस लिस्ट में दूसरा सबसे विवादित नाम पूर्व डीजीपी राजीव कुमार का है. राजीव कुमार वही अधिकारी हैं, जिनके लिए ममता बनर्जी 2019 में सीबीआई के खिलाफ धरने पर बैठ गई थीं. सारधा चिटफंड घोटाले की जांच के दौरान उन पर साक्ष्य मिटाने के आरोप लगे थे. हाल ही में जनवरी 2026 में रिटायर होने के बाद, उन्हें तुरंत राज्यसभा का टिकट मिलना यह दर्शाता है कि ममता बनर्जी अपने वफादारों को कभी अकेला नहीं छोड़तीं. बीजेपी ने इस नामांकन को इनाम करार दिया है.
कोयल मल्लिक और मेनका गुरुस्वामी कौन हैं?
ममता बनर्जी ने इस बार सोशल इंजीनियरिंग का भी ध्यान रखा है. बंगाली फिल्म जगत की मशहूर अभिनेत्री कोयल मल्लिक को राज्यसभा भेजकर उन्होंने ग्लैमर और मध्यम वर्ग के वोट बैंक को साधने की कोशिश की है. वहीं, सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी का नाम भी इस सूची में शामिल है. मेनका गुरुस्वामी को शामिल करके ममता बनर्जी दिल्ली की अदालती लड़ाइयों और संवैधानिक मुद्दों पर टीएमसी का पक्ष मजबूती से रखने की योजना बना रही हैं.
विपक्ष ने कहा दगाबाजों और दागी चेहरों की फौज
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और शुभेंदु अधिकारी ने इन नामों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उनका कहना है कि ममता बनर्जी ने उन लोगों को चुना है जिन्होंने या तो बीजेपी के साथ विश्वासघात किया है या फिर प्रशासन में रहते हुए टीएमसी के कैडर के रूप में काम किया है. विशेष रूप से बाबुल सुप्रियो को लेकर बीजेपी कार्यकर्ता सोशल मीडिया पर बाबा रामदेव के उस पुराने वीडियो को साझा कर रहे हैं, जिसमें उन्होंने बाबुल की सिफारिश की थी.
आज इन सभी उम्मीदवारों को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने का प्रमाण पत्र मिल गया है. बाबुल सुप्रियो ने इस अवसर पर कहा कि उनके लिए यह एक नई जिम्मेदारी है और वे बंगाल की जनता की आवाज दिल्ली में मजबूती से उठाएंगे. अब देखना यह होगा कि ये चेहरे संसद के उच्च सदन में टीएमसी की धार को कितना तेज कर पाते हैं.
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