सलाम है! 10वीं और 12वीं पास महिलाओं ने खड़ी कर दी 4.5 करोड़ की कंपनी, 4000 दीदियों को बनाया लखपति

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झारखंड के हजारीबाग में महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास की मिसाल पेश करते हुए एक अनोखी पहल की है. यहां की महिलाओं ने मिलकर अपनी खुद की कंपनी बनाकर न सिर्फ आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में कदम बढ़ाया है, बल्कि हजारों किसानों के जीवन में भी बदलाव लाने का काम किया है. उन्होंने मेहनत और एकजुटता के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है. साल 2025-26 में कंपनी का टर्नओवर 4 करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो महिला सशक्तिकरण की प्रेरक कहानी बन गया है.

हजारीबाग: महिला सशक्तिकरण के कई उदाहरण देखने को मिलते हैं, लेकिन हजारीबाग की महिलाओं ने आत्मनिर्भर बनने की दिशा में एक अनोखी मिसाल कायम की है. यहां की महिलाओं ने मिलकर अपनी खुद की कंपनी बना डाली है. खास बात यह है कि इस पहल से जुड़ी ज्यादातर महिलाएं या तो अनपढ़ हैं या बहुत कम पढ़ी-लिखी हैं. इसके बावजूद साल 2025-26 में इस कंपनी का टर्नओवर 4 करोड़ रुपये से अधिक रहा. वहीं चालू वित्तीय साल में कंपनी ने 4.5 करोड़ रुपये के टर्नओवर का लक्ष्य तय किया है.

इस कंपनी का नाम चूरचू नारी ऊर्जा फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड है. यह मुख्य रूप से कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के कारोबार से जुड़ी हुई है. कंपनी किसानों को आर्थिक सहायता देने के साथ-साथ खेती के लिए जरूरी संसाधन भी उपलब्ध कराती है. वर्तमान में इस कंपनी से लगभग 7000 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जिनमें करीब 4000 महिलाएं अंशधारक हैं.

कंपनी की प्रेसिडेंट सुमित्रा देवी बताती हैं कि उनका लक्ष्य जिले के छोटे-छोटे किसानों को लखपति बनाना है. इसके लिए कंपनी किसानों को खेती की नई तकनीक सिखाती है और उन्हें प्रमाणित बीज और खाद उपलब्ध कराती है. किसानों को अपने उत्पाद के बाजार की चिंता भी नहीं करनी पड़ती, क्योंकि कंपनी खुद किसानों से उत्पाद खरीदकर उसे मंडी तक पहुंचाती है. सामूहिक रूप से व्यापार होने के कारण मंडी में मोलभाव की क्षमता बढ़ जाती है और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है.

महिलाएं कैसे करती हैं काम
कंपनी से जुड़ने के लिए महिला किसानों को 100 रुपये देकर पंजीकरण कराना होता है. इसके बाद 1000 रुपये देकर वे कंपनी की अंशधारक बन सकती हैं. इस प्रक्रिया के बाद कंपनी किसानों को व्यापार से जुड़ी हर तरह की सहायता देती है. किसान इस सहयोग का उपयोग खेती, मछली पालन और पशुपालन जैसे कार्यों में करते हैं. इनसे प्राप्त उत्पादों को कंपनी एकत्र कर मंडियों में बेचती है, जिससे किसानों को बेहतर दाम मिलते हैं. साथ ही साल के अंत में कंपनी अपने मुनाफे का हिस्सा सभी अंशधारकों में बांटती है.

कंपनी की बोर्ड ऑफ डायरेक्टर ममता देवी बताती हैं कि पहले उन्हें खेती के दौरान कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था, लेकिन अब आर्थिक सहायता के साथ तकनीकी सहयोग भी मिल रहा है. उनके उत्पाद बाहर की मंडियों में भी अच्छी कीमतों पर बिक रहे हैं. एफपीओ के माध्यम से अच्छी किस्म के बीज मिल जाते हैं और बाजार में बेचने की चिंता भी नहीं रहती.

क्या है कंपनी का लक्ष्य?
वहीं कंपनी के सीईओ सौरव कुमार ने बताया कि यह पहल सामूहिक प्रयास का परिणाम है. महिला किसान मिलकर एक-दूसरे की आय बढ़ाने के लिए काम कर रही हैं. कंपनी का लक्ष्य है कि इससे जुड़ी प्रत्येक महिला की वार्षिक आमदनी कम से कम 1.20 लाख रुपये तक पहुंचे. इसी उद्देश्य को ध्यान में रखकर कंपनी लगातार काम कर रही है. अगर यही मॉडल आगे भी इसी तरह मजबूत होता रहा, तो आने वाले समय में यह पहल न केवल हजारीबाग बल्कि पूरे झारखंड के लिए महिला सशक्तिकरण और सामूहिक खेती का एक प्रेरणादायक उदाहरण बन सकती है.

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